ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की धूल में दबे उन अंतिम क्षणों को जानना, मानो स्वयं काल के प्रवाह को छू लेना है।
कर्णपर्व · अध्याय 46
अंतिम आक्रामक