ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस अंतिम रणक्षेत्र की धूल में दबे रहस्यों को सुनने हेतु, देवरात, आज तुम मेरे समीप बैठो।
कर्णपर्व · अध्याय 55
अंतिम संकल्प