ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस अंतिम प्रहर की छाया आज भी हमारी चेतना में दुर्योधन के उस क्रंदन के रूप में गूंजती है, जहाँ अहंकार और विनाश का मिलन हुआ था।
कर्णपर्व · अध्याय 60
दुर्योधन का शोक