ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की धूल और रक्त से सने उस अंतिम क्षण को याद कर आज भी हृदय में एक गहरी शून्यता भर जाती है।
कर्णपर्व · अध्याय 64
नियति का अंतिम क्षण