ग्रंथसार
विधाता के विधान और कर्मों के चक्र के बीच फँसे महाबली कर्ण की उस अंतिम घड़ी का स्मरण करना, हृदय में करुणा और धर्म की जटिलता का बोध करा देता है।
कर्णपर्व · अध्याय 7
कर्ण की विवशता