ग्रंथसार
रणभूमि की धूल जब बैठती है, तो पीछे केवल शोक का सन्नाटा और अपूरणीय क्षति का बोध ही शेष रह जाता है।
कर्णपर्व · अध्याय 81
कौरवों का विलाप