ग्रंथसार
सूतजी की अमृतमयी वाणी से कुरुक्षेत्र की उस संध्या का रहस्य आज भी हृदय को झकझोर देता है।
कर्णपर्व · अध्याय 82
महत्वाकांक्षा का सूर्यास्त