ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की उस धधकती रणभूमि में, जहाँ दानवीर कर्ण का रथ थमा था, वहीं से नियति के महाकाव्य का अंतिम अध्याय रचा गया।
कर्णपर्व · अध्याय 83
अंतिम संघर्ष