ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभूमि से उठने वाली वह चीख आज भी इतिहास के पन्नों में गूँजती है, जहाँ एक मित्र ने अपने मित्र को खोने का दुख भोगा था।
कर्णपर्व · अध्याय 93
दुर्योधन का विलाप