ग्रंथसार
नियति की डोर से बंधे मनुष्य के संघर्ष और कर्ण की महागाथा के मर्म को आज हम गुरु-शिष्य की इस चर्चा में अनुभव करेंगे।
कर्णपर्व · अध्याय 95
भाग्य का बोझ