ग्रंथसार
काल के प्रवाह में जब युग का सूर्य अस्त होने को होता है, तब स्वयं सृष्टि के नियंता भी अपनी लीला को समेटने का संकेत देते हैं।
मौसलपर्व · अध्याय 3
शेषनाग का प्रस्थान