ग्रंथसार
गुरुदेव, जब धर्म अधर्म के सम्मुख खड़ा होता है, तो वह युद्ध की भाषा क्यों अपनाता है?
सभापर्व · अध्याय 22
जरासंध और श्रीकृष्ण का शास्त्रार्थ व ललकार