ग्रंथसार
सूतजी की अमृतवाणी में छिपी है उस मायावी सभा की कथा, जिसने न केवल पाण्डवों के वैभव को परिभाषित किया, बल्कि नियति के चक्र को भी एक नया मोड़ दिया।
सभापर्व · अध्याय 3
मय-सभा का अलौकिक निर्माण