ग्रंथसार
नयीमिषारण्य की पावन भूमि पर आज धर्म की एक ऐसी गाथा गूँज रही है, जहाँ स्वयं पितामह भीष्म ने श्रीकृष्ण को जगत का आधार स्वीकार किया था।
सभापर्व · अध्याय 36
भीष्म द्वारा श्रीकृष्ण की स्तुति और सहदेव द्वारा अर्घ्य-दान