ग्रंथसार
नयी सभा के निर्माण और पाण्डवों के प्रवेश की कथा में केवल वैभव नहीं, बल्कि उस काल के धर्म-अनुष्ठान का दर्शन छिपा है।
सभापर्व · अध्याय 4
मय-सभा में पाण्डवों का प्रवेश