ग्रंथसार
अहंकार की आँखों पर जब ईर्ष्या की पट्टी बँध जाती है, तब साक्षात स्वर्ग भी जलती हुई अग्नि के समान प्रतीत होने लगता है।
सभापर्व · अध्याय 45
मय-सभा में दुर्योधन का वास और ईर्ष्या