ग्रंथसार
अहंकार की अग्नि में जलते हुए मनुष्य को संसार का सारा वैभव भी राख समान क्यों प्रतीत होने लगता है, आइए आज इसी के रहस्य को समझते हैं।
सभापर्व · अध्याय 50
धृतराष्ट्र के सम्मुख दुर्योधन का विलाप