ग्रंथसार
नयी सुबह की किरणों के साथ सूतजी के आश्रम में इतिहास की वह विभीषिका गूँज उठी, जिसने हस्तिनापुर के स्वर्ण-सिंहासन को राख के ढेर में बदल दिया था।
सभापर्व · अध्याय 58
पाण्डवों का हस्तिनापुर आगमन