ग्रंथसार
गुरुदेव सूतजी के मुख से देवराज इन्द्र की उस अलौकिक सभा का वर्णन सुनकर जैसे नैमिषारण्य का वातावरण ही स्वर्गिक आभा से भर गया।
सभापर्व · अध्याय 7
इन्द्र-सभा का दिव्य वर्णन