ग्रंथसार
नर्मदा तट पर बैठे सूतजी के मुख से पाण्डवों के वनवास की करुण गाथा सुनकर देवरात की आँखों में भी आँसू भर आए।
सभापर्व · अध्याय 76
पाण्डवों का हस्तिनापुर से प्रस्थान