ग्रंथसार
क्या प्रतिशोध की अग्नि में जलता हुआ मन कभी विवेक के प्रकाश को देख पाता है, या वह स्वयं ही अपनी बर्बादी का कारण बन जाता है?
सौप्तिकपर्व · अध्याय 1
अश्वत्थामा का प्रतिशोध