ग्रंथसार
युद्ध की विजय का उत्सव नहीं, अपितु उसके पीछे छिपे मौन और श्मशान जैसे सन्नाटे को समझने के लिए आज हम सौप्तिकपर्व के अंतिम अध्यायों की छाया में प्रवेश करेंगे।
सौप्तिकपर्व · अध्याय 18
अंतिम चिंतन