ग्रंथसार
अंधेरी रात के सन्नाटे में जब धर्म और अधर्म की सीमाएं धुंधली हो गई थीं, तब एक योद्धा के प्रतिशोध ने इतिहास की धारा ही मोड़ दी।
सौप्तिकपर्व · अध्याय 3
शिविर में नरसंहार