ग्रंथसार
युद्ध की विभीषिका केवल अस्त्रों के टकराने तक सीमित नहीं होती, अपितु वह उन मौन चीखों में भी जीवित रहती है जो विजय के उत्सव को श्मशान की शांति में बदल देती हैं।
सौप्तिकपर्व · अध्याय 5
बचे हुए लोगों का पलायन