ग्रंथसार
क्या प्रतिशोध की ज्वाला में जलते हुए मनुष्य को यह आभास होता है कि वह अपने ही विनाश का मार्ग प्रशस्त कर रहा है?
सौप्तिकपर्व · अध्याय 8
पीछा और आमना-सामना