ग्रंथसार
अंधेरी रात के सन्नाटे में जब विवेक सो जाता है, तब प्रतिशोध की ज्वाला पूरे कुल का विनाश कर देती है।
शल्यपर्व · अध्याय 19
स्वप्न में संहार