ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभूमि की धूल अब शांत हो चुकी थी, किंतु उस धूल के नीचे दबी पीड़ा की कहानियाँ आज भी हृदय को कंपित कर देती हैं।
शल्यपर्व · अध्याय 20
दुर्योधन के पास वापसी