ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस अंतिम रणक्षेत्र में जब धूल और रक्त का कोहरा छंट रहा था, तब धर्म और अहंकार के बीच हुआ वह अंतिम संवाद आज भी इतिहास की गूँज बनकर शेष है।
शल्यपर्व · अध्याय 23
अंतिम संवाद