ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की धूल शांत होते ही इतिहास के पन्नों में एक ऐसे अध्याय का अंत हुआ, जिसकी गूँज आज भी मानवता को दिशा दिखाती है।
शल्यपर्व · अध्याय 24
युग का समापन