ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभूमि में जब काल का चक्र अपनी अंतिम गति पर था, तब मद्रराज शल्य के पराक्रम ने समूचे धर्मयुद्ध को एक नई और भयानक दिशा दे दी थी।
शल्यपर्व · अध्याय 3
भयानक संग्राम का आरम्भ