ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की धूल में दबे उस पराभव के क्षण को याद करते ही आज भी हृदय कांप उठता है, जहाँ एक साम्राज्य का सूर्यास्त हो रहा था।
शल्यपर्व · अध्याय 38
कौरव सेना का बिखराव