ग्रंथसार
अहंकार की पराकाष्ठा और अंत की नीरवता के बीच, कुरुक्षेत्र की धूल में दबे उस जीवन का सत्य आज भी हमें सचेत करता है।
शल्यपर्व · अध्याय 39
दुर्योधन का क्षीण जीवन