ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस अंतिम संध्याकाल की गूँज आज भी इतिहास की गहराइयों में सत्य और अधर्म के द्वंद्व का साक्ष्य बनकर जीवित है।
शल्यपर्व · अध्याय 4
कौरवों की अंतिम आशा का क्षय