ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की विजय के बाद जब रक्त से सनी भूमि पर सन्नाटा पसरा, तब धर्मराज युधिष्ठिर के मन में क्या उथल-पुथल मची होगी?
शल्यपर्व · अध्याय 40
धर्म का मौन साक्षी