ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रक्त-रंजित धरा पर जब अंतिम द्वंद्व की बेला आई, तब दुर्योधन के अहंकार और भीम की प्रतिज्ञा के बीच काल स्वयं स्तब्ध खड़ा था।
शल्यपर्व · अध्याय 42
कौरव राज का उदय