ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की धूल जब शांत हुई, तो विजय के उत्सव की गूँज नहीं, अपितु एक मूक रुदन शेष रह गया था।
शल्यपर्व · अध्याय 52
विनाश का शोक