ग्रंथसार
अधर्म के उस घोर अंधकार में, जब न्याय का सूर्य डूब चुका था, तब प्रतिशोध की एक ऐसी चिंगारी भड़की जिसने कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि को रक्त से सिंचित कर दिया।
शल्यपर्व · अध्याय 63
विनाश का पथ