ग्रंथसार
क्या शासन मात्र सिंहासन पर बैठना है, या यह जन-जन के दुखों को हरने का एक कठिन व्रत है?
शान्तिपर्व · अध्याय 109
प्रजापालन और रक्षक का धर्म