ग्रंथसार
मुक्ति का अर्थ मृत्यु नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों के बीच रहकर भी मोह-माया से परे हो जाना है।
शान्तिपर्व · अध्याय 120
मुक्ति के विविध मार्ग