ग्रंथसार
मौन केवल शब्दों का अभाव नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर छिपी अनंत शांति को सुनने का एक दिव्य अवसर है।
शान्तिपर्व · अध्याय 126
मौन की महिमा