ग्रंथसार
मित्रता केवल भावनाओं का मिलन नहीं, बल्कि धर्म और विवेक की कसौटी पर परखी गई एक पावन अग्निपरीक्षा है।
शान्तिपर्व · अध्याय 127
मित्र की परख और मित्रता का धर्म