ग्रंथसार
धर्म के सूक्ष्म धागों में ही इस संसार की मर्यादा सुरक्षित है, आइए पितामह भीष्म पितामह के उस संवाद को समझें जो आज भी हमारा मार्ग प्रशस्त करता है।
शान्तिपर्व · अध्याय 137
धर्म का स्वरूप