ग्रंथसार
क्या बाहरी विजय प्राप्त करना ही जीवन की पूर्णता है, या वास्तविक शक्ति कहीं और छिपी है?
शान्तिपर्व · अध्याय 139
आत्म-संयम का महत्त्व