ग्रंथसार
क्या सत्ता के सिंहासन पर बैठकर भी कोई व्यक्ति वैराग्य की ऊंचाइयों को छू सकता है, यही प्रश्न आज हम सूतजी महाराज से जानेंगे।
शान्तिपर्व · अध्याय 140
निष्काम शासन का मार्ग