ग्रंथसार
क्या आप जानते हैं कि एक सम्राट के लिए सबसे बड़ा शत्रु कोई बाहरी राजा नहीं, बल्कि उसके भीतर बैठा लोभ होता है?
शान्तिपर्व · अध्याय 142
लोभ और अज्ञान का त्याग