ग्रंथसार
आश्रम की शांत संध्या में जब दीप प्रज्वलित हुए, तब देवरात के मन में एक गंभीर प्रश्न उठा कि आखिर साम्राज्य और आत्म-विजय में से किसे श्रेष्ठ माना जाए।
शान्तिपर्व · अध्याय 152
इन्द्रिय संयम का महत्व