ग्रंथसार
सदाचार की सुगन्ध से ही मनुष्य का जीवन पुष्प की भांति महकता है, आइए इस पावन संवाद की ओर चलें।
शान्तिपर्व · अध्याय 158
सदाचार का स्वरूप