ग्रंथसार
नयी सुबह की शांत आभा में जब आश्रम के वृक्षों ने हवा के साथ मंत्र पढ़े, तब सूतजी ने जीवन के सबसे कठिन रहस्य को खोलने का विचार किया।
शान्तिपर्व · अध्याय 161
कर्मों का फल