ग्रंथसार
आश्रम की शांत संध्या में जब दीप प्रज्वलित हुए, तब सूतजी ने धर्मराज युधिष्ठिर के धैर्य का वह गूढ़ प्रसंग छेड़ा, जो आज भी जीवन को नई दिशा देने में समर्थ है।
शान्तिपर्व · अध्याय 162
धैर्य का महत्व