ग्रंथसार
ज्ञान का दीप जब प्रज्वलित होता है, तो अज्ञान का घना अंधकार स्वयं ही विलीन होने लगता है।
शान्तिपर्व · अध्याय 165
ज्ञान का स्वरूप